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फ़ाइल फोटो: नागपुरी अभिनेत्री एंजेल लकड़ा |
Angel Lakra Success Story: अपनी लेखनीय को शुरु करने से पहले ये कह देना चाहता हूं कि सोहन लाल द्विवेदी की यह पंक्ति सौ प्रतिशत सत्य है “कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”. क्योंकि, हम जिनकी कहानी आज आपको बताने वाले हैं उनके बारे में यह लाइनें बिलकुल सटीक बैठती है. दरअसल, राजधानी रांची की रहने वाली नागपुरी एक्ट्रेस और मॉडल एंजेल लकड़ा ने सफलता पाने के लिए कभी भी अपने किस्मत को नहीं कोसा. उनके अथक प्रयास के बदौलत सफलता हासिल की. इस ब्लॉग में मैं आपको उनके संघर्ष से सफलता की कहानी बताने जा रहा हूं जो आपके जीवन में आने वाली चुनौतियों से लड़ने में भी मदद करेगी.
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ऐसे शुरु हई संघर्ष
आपको बता दें कि एंजेल लकड़ा झारखंड की रहने वाली हैं और एक आदिवासी परिवार से
सम्बन्ध रखती हैं. खास बात तो यह है कि इस घर से बेटियां अकेली बाहर भी नहीं जा सकती
फिर मॉडलिंग व एक्टिंग तो समुद्र के दूसरे छोर में थी. जब घर से कोई समर्थन नहीं
मिला तो एंजेल अपने मामा घर (रातू) में रहकर अपने सपनों पर मुकम्मल होने की प्रयास
करने लगी. मामा के मोबाइल में रैंपवाक से लेकर एक्टिंग देखकर सीखना शुरू कर दी. जब कभी मन हो छत पर ही इन चीजों का प्रैक्टिस कर
लेतीं.
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जब रिलीज़ हुआ पहला सांग
दरअसल, एंजेल के मेहनत को देखते हुए ‘चाहो ना’ सांग में काम
करने का अवसर प्राप्त हुआ. गाना को भी दर्शकों ने खूब प्यार दिया. अलबम हिट होने
लगे तो नागपुरी फिल्म ‘तोर बिना’ में काम मिल गया. लेकिन, परिवार वालों ने कहा ये
सब छोड़ दो. लोग तरह-तरह की बातें करने लगे हैं. वे हमारी आलोचना करते हैं. हमारे
घर की बेटियां फिल्मों में काम नहीं करती हैं. अब उनके पास विपरीत परिस्थिति थी.
फिर भी एंजेल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और घर की दहलीज़ पार कर दीं.
अब न बचे घर न जेब में पैसे
एंजेल ने बताया कि परिवार वालों का समर्थन नहीं मिला तो
रांची में अकेली रहना शुरू कर दी. अपने मुकाम को हासिल करने के लिए दिन-रात लगातार
काम करने से सोने का समय नहीं मिलने लगे. खूब मेहनत करने लगी लेकिन न ज्यादा पैसे
मिलते न ही सफ़लता. एक दिन ऐसा भी आया कि न जेब में पैसे बच गये न ही घर में कुछ
खाने को थे. हफ़्ते भर भूखे रही. उस समय तीन बिमारियों से भी लड़ रही थी. फिर अचानक
एक कॉल आया जो मेरे लिए वरदान की तरह थी. क्योंकि, उसमें एक गाने का शूट के लिए
कहा गया. तबियत ठीक न होते हुए भी दिन भर गाने की शूटिंग की. जिसके मुझे बारह सौ
रूपये मिले.
गौरतलब है कि एंजेल को धीरे-धीरे काम मिलना शुरू हुआ ही था कि अचानक देश में संपूर्ण लॉकडाउन लग गया. परिणाम में फिर से सपने टूटे. कोई रास्ता नजर नहीं आने लगा, तो अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरु की. बाद में, जब काम निकला तब घर वाले भी समर्थन करने लगे. अब होना क्या था वर्तमान में तीन सौ से भी ज्यादा अलबम रिलीज़ हो गई है और कई फिल्मों में काम की और कर भी रही हैं. ऐसे में कई विषम परिस्थितियों से लड़ते हुए खुद को साबित की और लाखों की संख्या में चाहने वालों को भी अपने नाम किया.
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