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बिहार के इस मंदिर की अद्भुत मान्यता, नीर से नेत्र पीड़ितों की रोशनी व फूल के महाप्रसाद से संतान की होती है प्राप्ति, जानें विस्तार से..



बिहार के जमुई जिला में स्थित मां नेतुला मंदिर नेत्र व पुत्र प्राप्ति देवी के रूप में प्रसिद्ध है. यह मंदिर सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव में स्थापित है. फिलहाल नवरात्र प्रारंभ हो गई है और इस शारदीय नवरात्र के मौके पर यहां हर साल कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. मां नेतुला के दरबार में विशेष रूप से नवरात्रि पर 9 दिनों तक अन्य प्रदेशों से आने वाले महिला श्रद्धालु सुबह व शाम दंडवत कष्टी देती हैं.

बता दें, इस साल आज यानी 26 सितंबर को नवरात्र की पहली पूजा हुई. कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का पाठ शुरू हुआ. इस दौरान सभी व्रतधारी संकल्प लेकर मां नेतुला के दरबार में 9 दिनों तक साफ-सफाई करने के साथ सुबह-शाम हाजिरी लगाएगें. वहीं कुछ महिला व्रतधारी 9 दिनों तक निर्जला उपवास में रहेंगी. यहां नेत्र व पुत्र प्राप्ति की देवी के रूप में मां की पूजी जाती है. माता के दरबार में नीर और फूल महाप्रसाद है. वहीं, यहां के नीर से नेत्र पीड़ित मरीजों के आंखों की रोशनी एवं फूल के महाप्रसाद-से बांझपन को भी संतान की प्राप्ति होती है.

मौके पर मंदिर कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरदेव सिंह ने बताया कि नवरात्र के एक दिन पहले बिहार, बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसलिए मंदिर परिसर के आसपास विभिन्न भवनों में यात्रियों को रहने के लिए निःशुल्क स्थान दिया जाता है. इतने दूर-दूर से आने वाले भक्तों के पहुंचने का मुख्य कारण मां की शक्ति है. जिनकी मन्नतें पूरी हुई उनके रिश्तेदार भी यहां आकर माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और मनोकामना करते हैं.

मिली जानकारी के अनुसार नवरात्र के प्रथम दिन व्रतधारी संकल्प व शुद्धता के साथ व्रत शुरू करते हैं. सुबह शाम तालाब में स्नान कर माता के दरबार में दंडवत कष्टी दी जाती है. इसके बाद माता को भोग लगाकर फलाहार करते हैं. साथ ही सुबह 11 बजे एवं संध्या 7:30 बजे महाआरती में सभी श्रद्धालु शामिल होते हैं. वहीं अष्टमी पूजा के बाद मंदिर परिसर में सरकारी बली के बाद हजारों पाठे की बली दी जाती है. मंदिर के पुजारी श्मशान भूमि में शमशान देवी की पूजा करते हैं. इस दौरान भुआ, पाठा, भेड़, केला, नारियल की भी बलि दी जाती है.

गौरतलब है कि मंदिर कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरदेव सिंह व सचिव कृष्णनंदन सिंह ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी की ओर से 28 शौचालय, 6 स्नानघर, 24 घंटा पानी की सप्लाई, आठ चापाकल, चार सफाई कर्मी सहित स्काउट गाइड लखीसराय की टीम की व्यवस्था की गई है. पांच हजार से अधिक यात्रियों के रहने के लिए यात्री कुंज, धर्मशाला, सभा भवन, सामुदायिक भवन, हाईस्कूल सहित 2 वाटर प्रूफ पंडाल की व्यवस्था की गई है.

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